Monday, September 30, 2019
Sindhutai Tai ki kahani
सिंधु ताई की कहानी
जन्म 14 नवंबर 1948
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिंदू
पति श्री हरी सपकाल
सिंधुताई का जन्म एक गरीब परिवार के घर 14 नवंबर 1948 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले में पिपरी गांव में हुआ था|इनके पिताजी जानवरों को चराने का कार्य करते थे सिंधुताई को बचपन में घर में पसंद नहीं किया जाता था क्योंकि इन्होंने बेटी के रूप में जन्म लिया था इसलिए सिंधुताई जी बचपन में चिंदी मतलब कपड़े का फटा टुकड़ा कहकर बुलाते थे| सिंधु के पिताजी सिंधु को पढ़ाना चाहते थे लेकिन सिंधु की मां पाठशाला भेजना नहीं चाहती थी |आखिर का घर की आर्थिक परिस्थितियों के कारण एवं मा के विरोध एवं बाल विवाह हो जाने से चौथी कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी सिंधु ताई जी का 9 वर्ष की अवस्था में एक 30 वर्षीय व्यक्ति श्रीहरि सपकाल से शादी कर दी 20 वर्ष की आयु में सिंधु ताई जी 3 बच्चों की माँ बन गयीं थी|
सिंधु ताई जी ने 20 वर्ष की अवस्था में महिलाओं का संगठन की मुखिया थी जो गांव में महिलाएं मजदूरी का कार्य करती थी उस समय गांव के मुखिया महिलाओं को वेतन समय पर नहीं दे रहा था इसकी शिकायत जिलाधिकारी से कर दी इस बर्ताव के कारण गांव का मुखिया सिंधुताई से मन ही मन बदला लेने के लिए सोचने लगा एक दिन सिंधुताई के पति से कहने लगा कि जो तेरे पत्नी के पेट में बच्चा पल रहा है वह मेरा बच्चा है उस समय सिंधुताई 9 महीने की गर्भवती थी सिंधुताई के पति श्री हरि सपकाल को सिंधुताई पर गुस्सा आया और सिंधु ताई को मारपीट कर गायों के तबेले में डाल दिया एवं सभी गाएं छोड़ दी उसी तबेले में सिंधु ताई ने एक बच्ची को जन्म दिया था पति ने तो घर से निकाल दिया था तो वह सिंधुताई अपने मां के घर गई वहां भी सिंधु ताई की मां ने रहने से मना कर दिया पिताजी के देहांत हो चुका था पिताजी होते तो उन्हें रख लेते |सिंधुताई अपनी बच्ची को लेकर श्मशान घाट पहुंची श्मशान घाट में अपनी बच्ची का नाल पत्थर से तोड़ा अपना पेट भरने के लिए सिंधुताई भीख मांगते हो श्मशान में रात को रुकती थी उन्होंने कई बार आत्महत्या करने की सोची लेकिन उन्होंने सोचा कि मेरे जैसे ना जाने कितने बेसहारा होंगे उसी समय उन्होंने निश्चय किया जो अनाथ बच्चा मेरे पास आएगा मैं उसकी मां बनूंगी सिंधुताई भीख मांगती और बच्चों का भरण पोषण करती इस तरह धीरे-धीरे अनाथ बच्चे उनके साथ रहने लगी आज सिंधु ताई जी के परिवार में लगभग 1100 अनाथ बच्चों को गोद लिया 272 दामाद एवं 40 बहुए हैं| सिंधु ताई जी के द्वारा गोद लिए हुए बच्चे आज उच्च पद पर कार्यरत हैं जैसे डॉक्टर, वकील, इंजीनियर कुछ बच्चों ने तो बड़ा होकर खुद का अनाथ आश्रम खोल दिया है|
सिंधु ताई एक अच्छी वक्ता सिंधुताई जब भाषण देते हैं तब सुनने के लिए भीड़ इकट्ठी हो जाती है सिंधु ताई जी कविताएं भी लिखती हैं|
सिंधु ताई जी को अब तक 172 अवार्ड मिल चुके हैं कई बार राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित हो चुकी है जो सम्मान राशि मिलती है सारी अनाथ बच्चों के लिए खर्च करती इसलिए सिंधु ताई जी को महाराष्ट्र की मदर टेरेसा कहा जाता है|
सिंधु ताई जी के पति जब उनके पास रहने आए तो बहुत रोए और पछताए तब उनकी उम्र 80वर्ष हो चुकी थी सिंधुताई ने समझाया यदि आप मुझे अपने घर से नहीं निकाला होता तो आज इतने बच्चों की मां कैसे बन पाती सिंधुताई ने अपने पति को बच्चे के रूप में स्वीकार किया था|
सिंधुताई की कहानी हमें सिखाती है कि हमें धैर्य रखना चाहिए एक घर से निकाली गई महिला क्या से क्या कर सकती है तो हम क्यों नहीं कर सकते है |
कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें
जन्म 14 नवंबर 1948
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिंदू
पति श्री हरी सपकाल
सिंधुताई का जन्म एक गरीब परिवार के घर 14 नवंबर 1948 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले में पिपरी गांव में हुआ था|इनके पिताजी जानवरों को चराने का कार्य करते थे सिंधुताई को बचपन में घर में पसंद नहीं किया जाता था क्योंकि इन्होंने बेटी के रूप में जन्म लिया था इसलिए सिंधुताई जी बचपन में चिंदी मतलब कपड़े का फटा टुकड़ा कहकर बुलाते थे| सिंधु के पिताजी सिंधु को पढ़ाना चाहते थे लेकिन सिंधु की मां पाठशाला भेजना नहीं चाहती थी |आखिर का घर की आर्थिक परिस्थितियों के कारण एवं मा के विरोध एवं बाल विवाह हो जाने से चौथी कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी सिंधु ताई जी का 9 वर्ष की अवस्था में एक 30 वर्षीय व्यक्ति श्रीहरि सपकाल से शादी कर दी 20 वर्ष की आयु में सिंधु ताई जी 3 बच्चों की माँ बन गयीं थी|
सिंधु ताई जी ने 20 वर्ष की अवस्था में महिलाओं का संगठन की मुखिया थी जो गांव में महिलाएं मजदूरी का कार्य करती थी उस समय गांव के मुखिया महिलाओं को वेतन समय पर नहीं दे रहा था इसकी शिकायत जिलाधिकारी से कर दी इस बर्ताव के कारण गांव का मुखिया सिंधुताई से मन ही मन बदला लेने के लिए सोचने लगा एक दिन सिंधुताई के पति से कहने लगा कि जो तेरे पत्नी के पेट में बच्चा पल रहा है वह मेरा बच्चा है उस समय सिंधुताई 9 महीने की गर्भवती थी सिंधुताई के पति श्री हरि सपकाल को सिंधुताई पर गुस्सा आया और सिंधु ताई को मारपीट कर गायों के तबेले में डाल दिया एवं सभी गाएं छोड़ दी उसी तबेले में सिंधु ताई ने एक बच्ची को जन्म दिया था पति ने तो घर से निकाल दिया था तो वह सिंधुताई अपने मां के घर गई वहां भी सिंधु ताई की मां ने रहने से मना कर दिया पिताजी के देहांत हो चुका था पिताजी होते तो उन्हें रख लेते |सिंधुताई अपनी बच्ची को लेकर श्मशान घाट पहुंची श्मशान घाट में अपनी बच्ची का नाल पत्थर से तोड़ा अपना पेट भरने के लिए सिंधुताई भीख मांगते हो श्मशान में रात को रुकती थी उन्होंने कई बार आत्महत्या करने की सोची लेकिन उन्होंने सोचा कि मेरे जैसे ना जाने कितने बेसहारा होंगे उसी समय उन्होंने निश्चय किया जो अनाथ बच्चा मेरे पास आएगा मैं उसकी मां बनूंगी सिंधुताई भीख मांगती और बच्चों का भरण पोषण करती इस तरह धीरे-धीरे अनाथ बच्चे उनके साथ रहने लगी आज सिंधु ताई जी के परिवार में लगभग 1100 अनाथ बच्चों को गोद लिया 272 दामाद एवं 40 बहुए हैं| सिंधु ताई जी के द्वारा गोद लिए हुए बच्चे आज उच्च पद पर कार्यरत हैं जैसे डॉक्टर, वकील, इंजीनियर कुछ बच्चों ने तो बड़ा होकर खुद का अनाथ आश्रम खोल दिया है|
सिंधु ताई एक अच्छी वक्ता सिंधुताई जब भाषण देते हैं तब सुनने के लिए भीड़ इकट्ठी हो जाती है सिंधु ताई जी कविताएं भी लिखती हैं|
सिंधु ताई जी को अब तक 172 अवार्ड मिल चुके हैं कई बार राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित हो चुकी है जो सम्मान राशि मिलती है सारी अनाथ बच्चों के लिए खर्च करती इसलिए सिंधु ताई जी को महाराष्ट्र की मदर टेरेसा कहा जाता है|
सिंधु ताई जी के पति जब उनके पास रहने आए तो बहुत रोए और पछताए तब उनकी उम्र 80वर्ष हो चुकी थी सिंधुताई ने समझाया यदि आप मुझे अपने घर से नहीं निकाला होता तो आज इतने बच्चों की मां कैसे बन पाती सिंधुताई ने अपने पति को बच्चे के रूप में स्वीकार किया था|
सिंधुताई की कहानी हमें सिखाती है कि हमें धैर्य रखना चाहिए एक घर से निकाली गई महिला क्या से क्या कर सकती है तो हम क्यों नहीं कर सकते है |
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Tuesday, June 18, 2019
Independence day and Rakshabandhab mixed wishing script download
🙏Hello Dear,Welcome My Blog🙏
![]() |
| Script Image |
इस बार दो बड़े त्यौहार एक साथ,एक दिन पर पड़ रहे है,यह दोनों त्यौहार भारतीयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, Independence Day और Rakshabandhab दोनों 15 अगस्त को है,हम आप को Independence Day and Rakshabandhab mixed wishing script download करके wish कर सकते है आप भी डाउनलोड करो और अपने चाहने बालो को wish करो|
★★ 【 Independence Day Wishing script download】 15Aug.1947 को हमारा देश आजाद हुआ था,इस दिन हम अपनी आजादी का जस्न मानते है और शहीदों की क़ुरबानी को याद करते है।
★★【Rakshabandhan Wishing script download】रक्षाबंधन भारत में एक अहम त्यौहार है,इस त्यौहार को भाई-बहन का बंधन और भी अधिक मजबूत हो जाता है,बहन भाई के राखी बांधकर लंबी उम्र की कामना करती है,और भाई बहन की रक्षा करने का वचन देता है ।इस शुभ मौके पर हम एक दूसरे को wish करते है,Rakshabandhan and Independence Day wishing script download करके एक दूसरे को wish करे।
★★★हम आप के लिए whatsapp wishing script लाये है,Rakshabandhan and Independence Day script जिसका आप उपयोग करके wish कर सकते है अपने चाहने बालो को।
◆◆यह एक mixed script है,जिसमे Independence day और Rakshabandhan script दोनों के फीचर है,एक ही script के माध्यम से हम दोनों त्योहारो को एक साथ अपने चाहने बालो को wish कर सकते है, 【Independence Day and Rakshabandhab mixed wishing script download】
◆◆{IMAGE OF SCRIPT}◆◆
=>>>>Script features:-
◆Rakshabandhan and Independence Day mixed script◆Adsense friendly
◆Whatsapp and facebook share button
◆Change any image in script
◆Easy coding
◆Edited script easy
◆Support any size image
◆Easily add ads
◆Wishing SMS present in script
==>>>Lovely friends share the script and share the post.
🙏🙏 I Wishing You Independence Day And Rakshabandhab In Advance🙏🙏
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